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कभी सोचा है कि कितना विषैला हो सकता है आपका बेडरूम

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घर में हम जितनी देर रहते हैं, उसमें से ज्यादातर समय हमारा बेडरूम में गुजरता है। हमें पता ही नहीं चलता कि हमारे जीवन का इतना अहम हिस्सा कब विषैला होने की हद तक गंदा हो जाता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में कहा गया है कि हम अपने जीवन का 36 फीसदी हिस्सा बेडरूम में गुजारते हैं। मगर हमारी यह आरामगाह कई विषैले रसायन और माइक्रोब्स का अड्डा बन जाती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर समेत कई अन्य शोधों में कहा गया है कि हमारा बेडरूम इस हद तक विषैले तत्वों से भर जाता है कि इससे हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम सो रहे होते हैं तो हमारे शरीर का तंत्र मरम्मत और उपचार के फॉर्म में आ जाता है। इसका अथ यह हुआ कि इस समय हमारा शरीर सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अपने बेडरूम में मौजूद खतरों के बारे में अंजान बनने से बेहतर है, उसके बारे में जान लिया जाए।

गद्दों से निकलने वाली केमिकल डस्ट
आजकल ऐसे गद्दे भी आने लगे हैं, जिनमें आग से बचाव करने वाले तत्वों का भी इस्तेमाल किया जाता है। मगर डेवन की एक ईको आर्किटेक्चर कंपनी गेल एंड स्नोडन के डेविड गेल का कहना है कि गद्दों को आग से बचाने वाला बनाने के लिए उसमें जिन रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, वह सेहत के लिए खतरनाक होता है। इसमें कार्सिनोजेन भी हो सकता है। यह कमरे में मौजूद धूल में मिल जाते हैं और सांस लेने के साथ यह हमारे शरीर में दाखिल हो जाते हैं। इससे निपटने के लिए कमरे को हवादार और धूल रहित बनाए रखना अच्छा हो सकता है।

कार्पेट से हो सकता है अस्थमा
कमरे में बिछी कालीन आपके अस्थमा का कारण हो सकता है। एक हेल्थ वेबसाइट की प्रमुख डॉक्टर लीसा एकर्ले का कहना है कि कमरे में बिछी कार्पेट में धूल के बारीक कण, एलर्जी पैदा करने वाले तत्व, माइक्रोऑर्गेनिज्म जमा हो जाते हैं। इनकी मौजूदगी खतरनाक परेशानियों की जनक हो सकती हैं। यह दमा के अलावा त्वचा में जलन, सूजन और दानों का कारण हो सकते हैं। सबसे खतरनाक होते हैं धूल के कण, जिनसे गंभीर एलर्जी हो सकती है।

pillows

तकियों में जमा होता फंगस
सिर के नीचे लगा आरामदेह तकिया आपको बीमार करने का एक और बड़ा कारण हो सकता है। कई बार इसका कारण घर में आने वाले वे मेहमान हो सकते हैं, जिनके साथ तकिया शेयर करना पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के अध्ययन में इस्तेमाल तकियों में फफूंद की प्रजातियों के पाए जाने का खुलासा हुआ। यह हवा से भी हो सकते हैं और एक-दूसरे के इस्तेमाल से भी हो सकते हैं। यह सांस संबंधी समस्या के शिकार लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकते हैं। इसके अलावा तकिया कई बार मुंहासों, सिर में खुजली और त्वचा में एलर्जी का कारण हो सकते हैं। इससे बचने के लिए सोने से पहले से अपने बालों को सुखाना जरूरी होता है। हफ्ते में एक बार तकियों को धूप में जरूर रखें और दो साल बाद इन्हें बदल दें।

लाइट बल्ब से त्वचा में क्षति होना
ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में कहा गया है कि बेडरूम में इस्तेमाल होने वाले फ्लोरोसेंट बल्ब (सीएफल) भी आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रोशनी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है। इनके इस्तेमाल से सिरदर्द का भी खतरा रहता है। एक अन्य तर्क के मुताबिक इन बल्ब से निकलने वाली नीली रोशनी नींद में बाधक बनती है। विशेषज्ञों का कहना है शाम के समय इनसान की आंख डूबते सूरज के लाल रंग को देखने की अभ्यस्त होती हैं। लाल रोशनी शरीर में नींद वाले मेलाटोनिन हॉर्मोन का उत्पादन बढ़ाती हैं।

bedroom headache

फर्नीचर से जलती हैं आंखें
बेडरूम के फर्नीचर से कई बार आंखों में जलन की शिकायत भी हो जाती है। इसका कारण इनमें इस्तेमाल होने वाली सिंथेटिक लकड़ी होती है। इन लकडि़यों को चाहे जितना पेंट कर दिया जाए, इनसे 20 साल तक खतरनाक गैसें निकलती रहती हैं। इसके अलावा फर्नीचर बनाने में इस्तेमाल ग्लू भी इसके लिए जिम्मेदार होती है। इसमें फॉर्मलडिहाइड होता है, जिससे आंखों, नाक और गले में जलन की शिकायत हो सकती है।

फोन के चार्जर नींद में बाधक
हमारा तंत्रिका तंत्र काफी कम वोल्टेज की बिजली पर काम करता है। डेविड गेल का कहना है कि हमारे नर्वस सिस्टम को बिजली या ऊर्जा की जरूरत मस्तिष्क से मांसपेशियों में संदेश भेजने के लिए होती है। कुछ लोगों में बेहद कम वोल्टेज में काम करने वाले चार्जर और इलेक्ट्रिक एलार्म घड़ी नींद खराब होने का कारण होती है।

दीवारों पर लगे पेंट करते हैं सिरदर्द
बेडरूम की दीवारों पर सजा खूबूसरत पेंट आपको सिरदर्द दे सकता है। इनमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो सूखने के बाद सांस के साथ शरीर में दाखिल होने पर चक्कर, सिरदर्द और दिमाग के काम को प्रभावित करने का कारण हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि, बेहतर होगा बेडरूम में पानी आधारित पेंट का इस्तेमाल किया जाए, जिसमें केसिन नाम का तत्व, मिट्टी और चूना का मिश्रण हो। केसिन दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है, जिसका इस्तेमाल मिस्र सभ्यता में किया जाता था।

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