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एक शोध में दावा किया गया है कि हमारे मस्तिष्क में कैद कुछ यादें जेनेटिक कोड में रखी होती हैं। इसे मेमोरी सूप भी कहा जा सकता है। एक जीव से निकालकर इन्हें दूसरे जीव में प्रतिरोपित किया जा सकता है। इस तरह दूसरे जीव को भी कुछ ऐसी बात याद रहेंगी, जो सिर्फ पहले जीव को ही पता थीं।

यह सब सुनकर अगर आपका दिमाग चकरा गया है या आपको यह साइंस फिक्शन फिल्म की कहा लग रही है, तो आप गलत हैं। लॉस एंजिलिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (यूसीएलए) में विशेषज्ञों ने इस संबंध में सफलता पूर्वक प्रयोग को अंजाम दिया है। अपनी तरह के इस अनोखे प्रयोग में वैज्ञानिकों ने समुद्री घोंघा की यादों को एक से निकालकर दूसरे में प्रतिरोपित कर दिया। इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक घोंघा का जेनेटिक मेसेंजर मॉलीक्यूल रीबोन्यूक्लीक एसिड (आरएनए) को निकालकर दूसरे में स्थापित कर दिया।

एक अन्य प्रयोग में वैज्ञनिकों ने लैब में आरएनए खुले न्यूरॉन के साथ पेट्रि डिश में डाल दिया। वैज्ञनिकों ने बताया कि दोनों प्रयोगों का अर्थ यह हुआ कि आरएनए में मौजूद कुछ बातें जिन्हें अब तक सिर्फ एक घोंघा जानता था, वह अब दूसरे को भी याद हैं। यह बेहद साधारण यादें हैं, जैसे घोंघा को मिला को झटका। दरअसल समुद्री घोंघा झटकों को भूलता नहीं है। झटका लगने पर वह मस्तिष्क को तंत्रिका तंत्र के जरिये संकेत देता है, इस संकेत पर उसके पेट पर लटक रही मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं।

प्रमुख शोधकर्ता और न्यूरोसाइंटिस्ट डेविड ग्लैंजमैन ने कहा कि घोंघा को अगर बार–-बार झटका लगता है, तो यह उसे याद रहता है। प्रतिक्रिया के तौर पर वह अपने पेट की मांस–पेशियों को लंबे समय के लिए सिकोड़ लेता है। यह साधारण याद्दाश्त पर आधारित साधारण बर्ताव था, जिसके जरिये वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग को सरल रूप में पेश किया। यह अध्ययन ई-न्यूरो पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित हुआ है। यूसीएलए वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग में बताया कि यादों का एक हिस्सा निकालकर दूसरे में प्रतिरोपित किया जा सकता है।

Related topics brain, Genetic Code, Neuron, Rna, Sea Snail, Transplanted Memory, UCL Experiment
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